स्वर्ग में घोटाला (एकांकी)
- पर्दा उठता है -
ब्रह्मा : (प्रसन्न वदन प्रवेश) गाता है – आज मैं ऊपर, आसमान नीचे; आज मैं आगे , ज़माना है पीछे……
नारद : (प्रवेश) आश्चर्य से – नारायण ! नारायण ! प्रभु ! आज आपने भाँग खा लिया है या नेचर फ़्रेश लाइट ऑयल से बना खाना खा लिया है ? क्या बात है ? आज तो आप हवा से बातें कर रहे हैं ?
ब्रह्मा : राज़ की बात कह दूं तो जाने फिर स्वर्ग में क्या-क्या हो ?
नारद : राज़ की बात ? राज़ की बात और नारद से छुपी है ? ऐसा अन्याय मत कीजिए प्रभु – जल्दी अपने राज़ का पर्दाफ़ाश कीजिए।
ब्रह्मा : बता दूँ मेरी खुशी का राज़ ?
नारद : जल्दी बताइए प्रभु।
ब्रह्मा : सुनो, किसी से न कहना। राज़ की बात यह है कि मैंने जीवन में पहली बार अवतार लिया है। अपना एक Right Hand create किया है।
नारद : (उछलकर) क्या !! नारायण ! नारायण ! आपने अवतार लिया है ? ब्रह्मा और अवतार ? यह बात कुछ हज़म नहीं हुई।
ब्रह्मा : क्यों हज़म नहीं हुई ? क्या ब्रह्मा अवतार नहीं ले सकता ?
नारद : अरे महाराज ! अवतार लेना आपका काम नहीं है। यह Department तो विष्णु और शिव जी का है। यही हमारे स्वर्ग का नियम है।
ब्रहमा : होगा – मैं नहीं मानता ऐसे नियम को। ज़रा सोचो, विष्णु और शिव ने कितने अवतार लिए हैं। अवतार ले-लेकर वे लोगों की नज़र में हीरो बन गए हैं जबकि सबसे बड़ा होकर भी मेरा रोल कितना छोटा है। कोई मुझे पूछ्ता नहीं है यार। उन लोगों के धरती पर कितने मदिर हैं। दिन-रात पूजा की सामग्री खा-खाकर अदनान सामी की तरह मोटे हो गए हैं। मेरा तो एक भी मंदिर नहीं है। देख मेरा health – रज़ाक ख़ान से भी गया गुज़रा है यार। बू-हू-हू—तुझे मेरी हालत पर तरस नहीं आता।
नारद : नारायण ! नारायण ! ज़्यादा Emotional मत होइए। मैं आपकी भावनाओं को समझ सकता हूँ। मगर आपने स्वर्ग का नियम तोड़ा है। इसकी सज़ा आपको मिलेगी-बरोबर मिलेगी। बताइए – कहाँ है आपका अवतार ?
ब्रह्मा : अवतार को मैंने धरती पर भेज दिया है। वह देखो- धरती पर ‘ भारत ’ नाम के उस भू-खंड पर। कितना अच्छा काम कर रहा है।
नारद : (देखकर) हाँय ! यह तो नायक नहीं, खलनायक है प्रभु ! इतना भयंकर रूप ! आपको इस असुर का गेटअप पसंद आया ? छि ! छि ! इसका नाम क्या है प्रभु ?
ब्रह्मा : ‘ घोटालासुर ’ अर्थात् Devil of scam. अरे ! उसका नाम और गेटअप छोड़- काम देख, काम। आज तक भारत में जितने भी घोटले हुए हैं – चीनी घोटाला, चारा घोटाला हवाला कांड, बोफ़ोर्स तोप कांड – सब इसी ने करवाए हैं। और आगे भी बहुत से घोटाले करने बाकी हैं जैसे – परमाणु-बम घोटाला, मिसाइल घोटाला, कश्मीर घोटाला, Playwin घोटाला, क्रिकेट घोटाला वगैरह..वगैरह….। कैसा लगा मेरा घोटालासुर का अवतार।
नारद : नारायण ! नारायण !, बकवास, बण्डल। अगर स्वर्गवासियों को पता चल गया तो अगले इलेक्शन में कोई आपको वोट नहीं देगा। विष्णु और शिव जी को पता चला तो आपकी गद्दी गई समझो।
ब्रह्मा : नहीं …… मेरी गद्दी, मेरा Post, मेरा carreer बर्बाद हो जाएगा। मुझे बचालो नारद। कुछ करो, कुछ करो नारद।
नारद : ऐसा कीजिए – यह खेल बंद कीजिए और घोटालासुर को वापस बुलाइए।
ब्रह्मा : यही तो PROBLEM है। अब मैं उसे नहीं बुला सकता।
नारद : क्यों ??
ब्रहमा : क्योंकि जिस रिमोट से मैं उसे पर कंट्रोल किया करता था, वह कहीं खो गया है।
नारद : यह क्या कह रहे हैं आप ? अब आप गए काम से। आपको कोई नहीं बचा सकता।
ब्रह्मा : ऐसा मत कहो नारद। तुम्हीं मुझे बचा सकते हो। कुछ करो नारद , कुछ करो।
नारद : ठीक है, ठीक है; मुझे सोचने दीजिए। ( सोचता है) हाँ, एक IDEA है।
ब्रह्मा : क्या ? जल्दी बोलो।
नारद : हमें यमराज के मदद लेनी होगी।
ब्रह्मा : यमराज ! वह तो मेरा पुराना दुश्मन है। मैं उसकी मदद नहीं लूँगा।
नारद : ऊहूँ – आप समझते क्यों नहीं; वक़्त की नज़ाकत को समझिए। इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं। वैसे भी मुसीबत में दुश्मन ही काम आते हैं। द्वारपाल ! यमराज को बुलाओ।
( द्वारपाल आता है और ‘ जैसी आज्ञा ’ कहकर चला जाता है। )
ब्रह्मा : मैंने सोचा भी नहीं था कि मेरी इस एक ग़लती के कारण मुझे इतने पापड़ बेलने पड़ेंगे। मेरी हालत धोबी के उस कुत्ते – सी हो गई है जो न घर का होता है न घाट का।
नारद : नारायण ! नारायण ! बिल्कुल सही मुहावरा CHOOSE किया है। मेरा मतलब है – कोई भी काम करने से पहले उसके परिणाम के बारे में सोच लेना चाहिए।
( यमराज और चित्रगुप्त का प्रवेश )
यम : यम हैं हम , हम हैं यम। क्यों बे ब्रह्मा ! तेरी मौत आई है जो यमराज को बुलाया है।
ब्रह्मा : अबे यम ! मुँह सँभाल कर बात कर। वैसे भी तू मेरे SUPPORTERS को ढूँढ-ढूँढ कर मौत से पहले ही उन्हें मारता रहा है और नरक में सड़ाता रहा है।
यम : और तूने कौन-सा अच्छा काम किया था ? पिछले Election में गुण्डे लगाकर BOOTH Capturing करके तूने मुझे हराया था और ख़ुद ब्रह्मा बन बैठा।
नारद : नारायण ! नारायण ! यह आपस में लड़ने का वक्त नहीं है। यम भाई ! ब्रह्मा मुसीबत में हैं और आपको उनकी मदद करनी है।
चित्रगुप्त : हूँ… जब पड़ा ग़म- याद आए हम। तुममें नहीं दम – बोलो, क्या करेगा यम ?
नारद : यम भाई ! ब्रह्मा जी ने एक अवतार लिया है और …….
यम : क्या ? इसने अवतार लिया है ? अत्याचार ! भ्रष्टाचार ! मैं सारे स्वर्ग में हल्ला मचा दूँगा- इसको बदनाम कर दूँगा।
ब्रह्मा : मैं तेरा ख़ून पी जाऊँगा।
यम : मैं तेरी बोटी-बोटी करके चील-कौवों को खिला दूँगा। अगर वे नहीं खाए तो मैं ख़ुद खा जाऊँगा।
चित्रगुप्त : छि: ! छि: ! क्या – क्या खाते रहते हैं आप।
नारद : ओफ़्फ़ो ! यम भाई ! आप मेरी बात सुनिए। ब्रह्मा जी के अवतार ने धरती पर प्रलय मचा रखा है। उसे वापस बुलाने वाला रिमोट कहीं खो गया है। उसे वापस लाने के लिए हमें दो-तीन फ़्रॉड और विलेन किस्म के आदमी चाहिए। ये काम आजकल के विलेन नहीं कर सकते। आपके पास पुराने ज़माने के बहुत-से ख़तरनाक विलेन हैं जो नरक में सड़ रहे हैं। आप हमें रावण, तैमूरलंग, क्रूरसिंह और जनरल डायर दे दीजिए।
चित्रगुप्त : वाह ! क्या Choice है। तीनों के तीनों अपने ज़माने के बड़े क्रूर, ख़तरनाक, छली-कपटी और लड़ाकू खलनायक थे।
यम : और इसके बदले मुझे क्या मिलेगा ?
नारद : आपको…( सोचकर) हाँ…. अगली बार आप ब्रह्मा बनेंगे। ब्रह्मा जी इलेक्शन नहीं लड़ेंगे। आप अकेले लड़िए और जीत जाइए। बोलिए, मंज़ूर है ?
यम : हा-हा-हा- मैं ब्रह्मा बनूँगा। मुझे मंज़ूर है।
ब्रह्मा : मगर मुझे मंज़ूर नहीं। मैं अपनी गद्दी नहीं छोड़ूँगा।
नारद : ( डाँटकर ) चुप ! चुप रहिए आप ! ग़लत-सलत काम करते हैं और बीच में टाँग अड़ाते हैं।
चित्र : बड़े आए अवतार लेने वाले। अब भुगतो।
ब्रह्मा : हाय ! मेरी गद्दी।
नारद : ( ब्रह्मा के कान में कुछ कहकर ) हाँ.. ब्रह्मा जी को भी मंज़ूर है। आप उन तीनों को बुलाइए।
यम : कौन है दूत ? ( दूत आता है ) जाओ, रावण , तैमूरलंग, क्रूरसिंह और जनरल डायर को पकड़कर लाओ। ( दूत जाता है ) हा-हा-हा- ब्रह्मा, मैं ब्रह्मा बनूँगा। लोगों को मार-मारकर बड़ा बोर हो गया था। अब आएगा मज़ा।
ब्रह्मा : ( रो-रोकर ) जब दिल ही टूट गया – अब जीकर क्या करेंगे (गाना)।
[ रावण, तैमूरलंग, क्रूरसिंह और जनरल डायर का प्रवेश ]
रावण : अहं ब्रह्मास्मि ! अहं ब्रह्मास्मि !
ब्रह्मा : चुप ! अहं ब्रह्मास्मि !
रावण : Oh! Sorry. अहं रावणास्मि। मैं रावण हूँ।
यम : ऐ ! चारों इधर आओ। देखो, वह रहा घोटालासुर । उसे धरती से पकड़ कर यहाँ लाना है। अलग-अलग दिशा में जाओगे, अपने-अपने ढंग से काम करोगे। जो उसे पकड़ कर लाएगा, उसकी नरक की सज़ा में 50% Discount और स्वर्ग में दस दिन रहने का बोनस मिलेगा। बोलो, कर सकोगे यह काम।
रावण : अहं रावणास्मि। यह मेरे बाएँ हाथ की कानी ऊँगली का काम है। मैं त्रिलोक विजयी था। यह काम मेरे लिए चींटी मारने के बराबर है। मैंने राम-लक्ष्मण के छक्के छुड़ा दिए थे तो यह किस खेत की मूली है। मैं उसके बारह बजा दूँगा। मैं अभी गया और कभी नहीं आया।
यम : क्या कहा ?
रावण : मैं अभी गया और उसके कान पकड़ कर अभी लाया। ( जाता है )
चित्र : और लँगड़े, तू क्या बोलता है ?
तैमूर : मैं लँगड़ा हूँ, काना हूँ। मगर इस एक टाँग और एक हाथ में इतनी ताक़त है कि सारी दुनिया पर क़हर ढा सकता हूँ। मैं लँगड़ा-लँगड़ा कर उसका पीछ करूँगा; उसे लूट कर बर्बाद कर दूँगा और उस लुटे हुए बर्बाद घोटालासुर के बदन में घोटाला करके उसका एक-एक अंग काट कर आपकी ख़िदमत में पेश करूँगा। मुझे इज़ाजत दीजिए। ( जाता है )
क्रूर सिंह : य़क्क ! यक्क ! महाराज, यक्क। मैं क्रूर सिंह, मेरा दिमाग़- शैतान का घर। मैं उस घोटालासुर को पाताल से भी ढूँढ निकालूँगा। अपनी ऐयारी शक्तियों से उसे चूहा बना दूँगा और अपने मुँह में दबा कर सबसे छुपाता हुआ उसे आपके पास ले आऊँगा। मेरा यक़ीन कीजिए, महाराज। यक्क ! यक्क ! ( जाता है )
डायर : हामखो लगटा हाय Mr. Ravana and ये लँगड़ा आदमी खुच नहीं खर फाएगा Because जो बोलटा हाय, वो खरता नेई हाय। टुमको हाम फ़र Believe करना मांगटा हाय। हामने साड़ी डुनिया फ़र खब्ज़ा खिया ठा। India फ़र Rule खरने का हमारा 200 Years खा Experience हाय। हामखो एक बार फिर India भेजने खे लिए ढन्याबाड। Bye….. ( जाता है )
यम : हाम बी चलटा हाय। काम हो जाए तो बता देना; हम ब्रह्मा बनने चले आएँगे। चल बे ज़ोकर। हम हैं यम, यम हैं हम।
[ मंच अंधकार ]
[ मंच आलोकित होने पर यम और चित्रगुप्त दिखाई देते हैं।]
यम : चित्रगुप्त ! उन चारों को गए हुए बीस दिन हो गए। मगर एक भी वापस नहीं आया। यह क्या हो रहा है ?
चित्र : Don`t worry, have patience. सब काम समय पर होगा। कोई आवाज़ आ रही है , लगता कोई आ रहा है।
रावण : ( रोते हुए) हाय ! मार डाला रे ! मार डाला। बहुत मारा.. बहुत मारा। कूट-कूट कर पीटा है। सारा बदन सूजा दिया है। हाय !
यम : अबे ! हुआ क्या, कुछ बोलेगा भी ? घोटालासुर कहाँ है ?
रावण : बताता हूँ। मैं यहाँ से सीधे अयोध्या में उतरा। रात में घूमते समय बावरी मस्ज़िद वालों ने पकड़ लिया। मुझे पहचान कर वे बड़े खुश हुए। कहने लगे – “ मिल गया ।” फिर उन्होंने मुझे खूब खिलाया-पिलाया और कहा, “ जा, राम मंदिर तोड़ कर आ। ” मुझे भी राम से पुराना हिसाब चुकता करना था, मैं चल पड़ा। मैं राम मंदिर तोड़ने ही वाला था कि लोगों ने मुझे देख लिया और मार-मार कर अधमरा कर दिया। मैं भागा। भागते-भागते ग़लती से मैं मैसूर पहुँच गया। वहाँ रावण-दहन का कार्यक्रम चल रहा था। जब लोगों ने मुझे देखा तो कहा- “ यह रहा असली रावण। पकड़ो इसे। इस बार असली रावण जलाएँगे। यह सुनते ही मैं भागा और भागते-भागते यहाँ पहुँच गया।
चित्र : यह तो हुई तेरी बात। घोटालासुर कहाँ है ?
रावण : उससे तो मेरी मुलाक़ात ही नहीं हुई।
यम : मतलब , असफल होकर लौटे हो। अभी बताता हूँ। दूत, इसे ले जाकर फिर से नरक में डाल दो। अगले त्रेता युग तक वहीं सड़ने दो इसे। [ दूत ले जाता है ]
चित्र : एक तो गया काम से। देखें, दूसरा क्या करता है।
( तैमूरलंग का प्रवेश )
यम : आओ, आओ लँगड़े। क्या लाए हो ? ये टूटी टाँग, ये फूटी आँख या और कुछ ?
तैमूर : हुज़ूर ! क्या बताऊँ। दिल्ली पुलिस – वाह क्या पुलिस थी। जैसे ही मैं दिल्ली पहुँचा- मेरी यादें ताज़ा हो गईं। मैं दिल्ली का सम्राट बनना चाहता था। मुझे लगा – मैं इस बार अपने इस सपने को पूरा कर सकता हूँ। इसलिए मैं अपनी तलवार से लोगों को गाजर-मूली की तरह काटता चलता गया। पर ज़ल्दी ही लोगों ने मुझे पकड़ लिया। जिस तैमूरलंग का नाम सुनकर दुनिया काँपती थी, उसी तैमूरलंग के हाथ-पैर काट डाले। फिर मुझ पर मुकद्दमा चला। पुरानी और नई क़त्लों-ज़ुर्मों के कारण मुझे फाँसी की सज़ा मिली। मेरे बिना हाथ-पैर वाले धड़ को फाँसी पर लटका दिया गया और मैं मरकर यहाँ वापस आ गया।
यम : याने, एक तो घोटालासुर वाला काम नहीं हुआ; दूसरे, तूने ख़ून-ख़राबा करके नरक में में Permanent ज़गह बना ली। ले जाओ इसे- इसे भी डाल दो नरक में। इसकी सज़ा और बढ़ा दो।
[ दूत तैमूर को ले जाता है। ]
( क्रूरसिंह बच्चे की तरह रोता हुआ आता है )
क्रूर : मैं चॉकलेट नहीं लूँगा, मुझे खिलौना चाहिए। नहीं, अभी चाहिए। उउँ……..
चित्र : इसे क्या हो गया ?
यम : अरे ! यह अपने बचपन में चला गया है और सब कुछ भूल गया है। कभी-कभी इसके साथ ऐसा हो जाता है। इसके सिर के पीछे मारो, यह अभी ठीक हो जाएगा।
[ चित्रगुप्त उसके सिर के पीछे मारता है ]
क्रूर : यक्क ! यक्क ! हायं, यहाँ कहाँ आ गया मैं ?
चित्र : यही तो, घोटालसुर के बगैर यहाँ कैसे आ गया ?
क्रूर : घोटालासुर, हाँ- याद आ गया। मैं घोटालासुर को पकड़ कर ला रहा था। मैं अपनी ऐयारी शक्तियों से उसे अपने वश में किए हुए था। हम एक गुफ़ा से होकर गुज़र रहे थे। काफ़ी अंधेरा था, हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था। अचानक किसी ने मेरे सिर पे वार किया। और…..और …..मुझे कुछ भी याद नहीं।
यम : हूँ…. मुझे याद है – तू नरक में सड़ रहा था और नरक में ही सड़ेगा। तेरे १०० वर्षों की सज़ा शायद कभी ख़त्म नहीं होगी। जब भी नब्बे वर्ष पूरे होते हैं , तुम बचपन में जाकर सब कुछ भूल जाते हो और सज़ा के वर्षों की गिनती फिर से एक से शुरु कर देते हो। जाओ भई, जाओ नरक में।
क्रूर : यक्क ! इस बार मैं नहीं भूलूँगा।
चित्र : यह तीसरा भी गया काम से। लगता है- ब्रह्मा बनना आपके नसीब में नहीं है।
यम : शुभ-शुभ बोल बे। अभी एक और बाकी है। ये अंग्रेज़ बड़े चालाक होते हैं। मुझे लगता है, वह घोटालासुर को ज़रूर पकड़ लाएगा।
चित्र : आ गया-आ गया-डायर आ गया। उसके साथ घोटालासुर भी है।
[ डायर का प्रवेश ]
यम : Welcome Dyre !
डायर : I am Dyre – पर बदन है लाइक वायर। My work quality is higher. हमको मत समझो कायर।
यम : सुनो Mr. Dyre, you are a lier. बातें करता जैसे शायर, हम तुम पे करेगा फ़ायर।
डायर : हामने टुमारा खाम खर दिया Mr. Yam. हामखो ईनाम मिलना माँगता। टुम फ़ायर का बाट करटा हाय; यह ढोखा हाय।
चित्र : तुमने भी तो भारतीयों के साथ धोखा किया था। जलियाँवाला बाग में उन पर अंधाधुंध गोलियाँ चलाई थी।
यम : अब तेरा क्या होगा डायर ?
डायर : यम ! मैंने टुम्हारे नरख की सज़ा खाई हाय।
यम : अब- गोली खा। [ गोली मार देता है ]
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घोटालासुर का प्रवेश [ साया की तरह आता है और भयानक हँसी हँसता हुआ चला जाता है ]
[ स्वर्ग में हो-हल्ला। चारों ओर ‘ घोटाला-घोटाला ’ की आवाज़ ]

पत्रकार : घोटालासुर स्वर्ग में। स्वर्ग में घोटाला। सारे देवता घोटाले में लिप्त। [ फिर दुहराता है ]
ब्रह्मा : ( प्रवेश ) यह क्या हो रहा है ?
नारद : ( प्रवेश ) नारायण ! नारायण ! यह सब कुछ आप ही का किया-धरा है। आपने घोटालासुर का निर्माण किया। अब चारों तरफ़ घोटाला ही घोटाला फैला रहा है। सभी देवता घोटाले में फँस गए हैं। सभी ने किसी न किसी चीज़ का घोटाला कर दिया है।
ब्रह्मा – किस-किस देवता ने किस-किस तरह का घोटाला किया है नारद ?
नारद : सबसे पहले आप- आपने अवतार लेकर अवतार घोटाला किया। शिव जी ने भाँग का सारा stock अपने नाम कराके ‘ भाँग घोटाला ’ किया है। गणेश ने स्वर्ग के सारे लड्डू अकले खाकर ‘ लड्डू घोटाला ’ किया। विश्वकर्मा ने सागौन की लकड़ी चुराकर ‘ लकड़ी घोटाला ’ किया। इंद्र ने कहीं ज़्यादा बारिश कराई तो कहीं नाम मात्र को तो कहीं बिल्कुल भी नहीं। इस तरह उन्होंने ‘ बारिश घोटाला ’ किया।
[ यम और चित्रगुप्त का प्रवेश ]
चित्र : अब आगे हमसे सुनिए। पवन देव ने अपनी शक्ति का नाज़ायज़ प्रयोग करके उड़ीसा में Cyclone लाया। उन्होंने ‘ Cyclone घोटाला ’ किया। सूर्य देव का घोटाला तो माफ़ी के काबिल नहीं। उन्होंने अपनी गर्मी से सारी बर्फ़ पिघलाकर बर्फ़ का stock ख़त्म किया और ‘ Temperature घोटाला ’। विष्णु जी ने हर ऐरे-गैरे की तपस्या सेव खुश होकर उन्हें हर तरह का वरदान देकर ‘ वरदान घोटाला ’ किया। और नारद ने – नाएद ने जहाँ-तहाँ झगड़ा लगाकर ‘ झगड़ा घोटाला ’ किया।
नारद : और चित्रगुप्त ! तुमने जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन में घोटाला नहीं किया ?
ब्रह्मा : यमराज को क्यों भूल रहे हो – उसने भी तो गरीबों को ज्य़ादा संख्या में मारकर ‘ मौत का घोटाला ’ किया है।
[ G.P.I.- घोटाला पकड़ इंस्पेक्टर का प्रवेश ]
GPI : इसका मतलब – आप सबने घोटाला किया है। मैं तो समझ रहा था, घोटाले सिर्फ़ धरती पर भारत में होते हैं। यहाँ स्वर्ग में तो सारे देवता घोटालों में फँसे हुए हैं।
यम : कौन हो तुम मनुष्य ? बिना मरे यहाँ कैसे पहुँच गए ?
GPI : मैं G.P.I. हूँ याने घोटाला पकड़ इंस्पेक्टर। मैं CBI की तरफ़ से घोटालासुर को पकड़ने उसके पीछे-पीछे यहाँ आया हूँ। बिना मरे कहीं भी आने-जाने का Licence है मेरे पास। ये देखो (लाइसेंस दिखाता है )
[ बमबारी की आवाज़। स्वर्ग हिलने लगता है ]
GPI : लगता है- घोटालासुर को पकड़ने America और England की सेना पहुँच गई है। एटम बम और मिसाइल से युद्ध कर रही है। घोटालासुर ने योद्ध घोटाला कर दिया तो कोई नहीं बचेगा। जान बचानी हो तो भागो। ( चला जाता है )
[ भयंकर विस्फोट। स्वर्ग ध्वंस हो जाता है ]
BACK GROUND VOICE : देखी आपने – घोटालासुर की करामात याने मेरी करामात ! मैंने किस तरह धरती को नहीं, स्वर्ग को भी तबाह कर दिया। मुझ जैसा बद्दिमाग, ज़ालिम, ख़तरनाक और ताक़तवर घोटालासुर क्या कर सकता है – सबने देखा। घोटाले से कभी किसी का भला नहीं हो सकता। इसका प्रभाव व्यक्तिगत नहीं सामूहिक रूप से पड़ता है। इसलिए; हमें स्वार्थ त्यागकर परमार्थ के ओर अग्रसर होना चाहिए। घोटाले में लिप्त प्रत्येक विश्वव्यापी ऐसे घटिया काम से बाज़ आ जाए- यह मेरी कामना है। वर्ना मैं घोटालासुर सब कुछ नष्ट कर दूँगा।
----------------------------------------------------पर्दा गिरता है ------------------------------------------------------

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